24 घंटे ड्यूटी, छुट्टी नहीं, सुविधाएं भी सीमित—फिर भी सवालों के घेरे में पुलिसकर्मी

24 घंटे ड्यूटी, छुट्टी नहीं, सुविधाएं भी सीमित—फिर भी सवालों के घेरे में पुलिसकर्मी

Written by Prem Prakash Agarwal 2026-03-28 News
झांसी/लखनऊ। देश की कानून-व्यवस्था को संभालने वाली पुलिस व्यवस्था इन दिनों एक बड़े विरोधाभास के बीच खड़ी नजर आ रही है। एक ओर जनता पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि पुलिसकर्मी अत्यधिक कार्यभार, सीमित संसाधनों और लगातार मानसिक दबाव के बीच काम करने को मजबूर हैं। अनिश्चित ड्यूटी ने बढ़ाया दबाव पुलिस विभाग में कार्यरत सिपाही और दरोगाओं के लिए ड्यूटी का कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है। दिन हो या रात, कभी भी उन्हें ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। त्योहार, पारिवारिक कार्यक्रम और निजी जीवन अक्सर उनकी जिम्मेदारियों के आगे पीछे छूट जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बिना तय समय के काम करना मानसिक और शारीरिक थकान को बढ़ाता है, जिसका असर कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। छुट्टी की व्यवस्था लगभग न के बराबर पुलिसकर्मियों के बीच यह आम शिकायत है कि उन्हें नियमित साप्ताहिक अवकाश (वीकली ऑफ) नहीं मिल पाता। कई बार छुट्टी लेने के लिए भी उच्चाधिकारियों की अनुमति मुश्किल से मिलती है। बीमार होने की स्थिति में भी कई पुलिसकर्मी ड्यूटी करने को विवश रहते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वेतन और भत्तों को लेकर असंतोष हालांकि आम धारणा यह है कि पुलिसकर्मियों को पर्याप्त वेतन मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ अलग है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि उनके कार्य के घंटे, जोखिम और जिम्मेदारियों के मुकाबले वेतन और भत्ते संतुलित नहीं हैं। कई भत्ते सीमित हैं या समय पर नहीं मिलते, जिससे आर्थिक दबाव भी बना रहता है। जनता की धारणा और वास्तविकता में अंतर सामान्य तौर पर जनता पुलिस की वर्दी, अधिकार और कुछ नकारात्मक घटनाओं के आधार पर पूरी व्यवस्था का आकलन कर लेती है। हालांकि यह भी सच है कि कई मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन पुलिसकर्मियों का कहना है कि उनकी कार्य-परिस्थितियों को नजरअंदाज कर केवल दोषारोपण करना समस्या का समाधान नहीं है। सिस्टम पर उठ रहे सवाल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी विभाग में कर्मचारियों से लगातार 12 से 24 घंटे तक काम लिया जाए, पर्याप्त विश्राम न मिले और संसाधन सीमित हों, तो कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में केवल सख्ती से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाया जा सकता है, या इसके लिए कार्य-प्रणाली में सुधार भी जरूरी है। सुधार की जरूरत पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिनमें— ड्यूटी के निश्चित समय का निर्धारण साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था वेतन और भत्तों में सुधार मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर ध्यान निष्कर्ष पुलिस व्यवस्था देश की सुरक्षा की रीढ़ है। ऐसे में यदि पुलिसकर्मी ही अत्यधिक दबाव और असंतोष के बीच काम करेंगे, तो इसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ना तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए केवल सख्ती ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों की कार्य-परिस्थितियों में सुधार भी उतना ही आवश्यक है।