बुंदेलखंड में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर फूटा आक्रोश, मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप

बुंदेलखंड में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर फूटा आक्रोश, मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप

Written by Prem Prakash Agarwal 2026-03-28 News
झाँसी । बुंदेलखंड की जर्जर चिकित्सा व्यवस्था को लेकर जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा गया, जिसमें क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। ज्ञापन में कहा गया कि अति पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र के अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और निजी अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ हैं। ऐसे में वे सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं, लेकिन यहां भी उन्हें समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और आवश्यक उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की स्थिति को उदाहरण के रूप में रखते हुए बताया गया कि यहां 175 स्वीकृत चिकित्सकों के पदों में से केवल 62 नियमित डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि 62 चिकित्सक संविदा पर नियुक्त हैं। शेष 51 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्थिति और गंभीर तब हो गई है जब कई नियमित चिकित्सकों ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया है और कई सेवानिवृत्ति के करीब हैं। आरोप लगाया गया कि संविदा चिकित्सकों के नवीनीकरण पर रोक लगा दी गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। वहीं हाल ही में 75 संविदा चिकित्सकों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए, लेकिन अपेक्षित संख्या में आवेदन भी प्राप्त नहीं हुए। मेडिकल कॉलेज में संसाधनों की कमी भी गंभीर चिंता का विषय है। वर्तमान में यहां केवल एक एमआरआई, एक सीटी स्कैन और दो अल्ट्रासाउंड मशीनें ही उपलब्ध हैं, जबकि 20 करोड़ रुपये से अधिक के उपकरणों की आवश्यकता बताई जा रही है। इसके विपरीत सरकार द्वारा मात्र 3-4 करोड़ रुपये का बजट ही आवंटित किया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि क्लास-2, 3, 4 और आउटसोर्स कर्मचारियों के आधे से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे मरीजों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में लोग निजी नर्सिंग होम का रुख करते हैं, जहां इलाज के लिए उन्हें अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ती है। मोर्चा ने सरकार के “सब चंगा है” और “विकास की गंगा” जैसे दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यदि जल्द ही चिकित्सकों और कर्मचारियों के रिक्त पद नहीं भरे गए, तो संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान अशोक सक्सेना, रजनीश श्रीवास्तव, प्रदीप झा, गोलू ठाकुर, हरवंश लाल, नरेश वर्मा, अरुण रायकवार, अभिषेक तिवारी, विजय रायकवार, शंकर रायकवार और प्रभुदयाल कुशवाहा सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।