मियाँ-बीबी, वॉइफ-हसबेंड व हब्बी-बब्बी की संस्कृति से बाहर निकलें हिन्दू: क्षेत्र प्रचार प्रमुख

मियाँ-बीबी, वॉइफ-हसबेंड व हब्बी-बब्बी की संस्कृति से बाहर निकलें हिन्दू: क्षेत्र प्रचार प्रमुख

Written by Prem Prakash Agarwal 2026-02-02 News
झांसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सोमवार को दीनदयाल नगर की अग्रसेन बस्ती में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए सकल हिन्दू समाज को मिया-बीबी, वाइफ-हसबेंड व हब्बी-बब्बी की संस्कृति से बाहर निकलकर अपने मूल संस्कारों की ओर लौटना होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंडोखर सरकार धाम के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज ने मातृ शक्ति से आह्वान किया कि वे अपनी बेटियों को सहेली बनाएं, उनसे खुलकर संवाद करें, ताकि वे किसी प्रकार के षड्यंत्र या लव जिहाद का शिकार न हों। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां भारती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। सरस्वती बालिका विद्या मंदिर, दतिया गेट की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक व देशभक्ति नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं कमल सिंह चौहान बालिका विद्या मंदिर की छात्राओं ने वीरांगना लक्ष्मीबाई पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। जुगनी सीरीज की भजन गायिका प्रियम श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत भजन “धर्म सनातन उत्तम है, डंके की चोट पर कहता हूं” ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मुख्य वक्ता सुभाष जी ने कहा कि हिन्दुस्थान में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है। जैसे फ्रांस में जन्म लेने वाला फ्रांसिस कहलाता है, वैसे ही हिन्दुस्थान में जन्मा हिन्दू कहलाता है। उन्होंने गुरु तेगबहादुर महाराज, महाराणा प्रताप एवं स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए बलिदान की परंपरा हमारे पुरखों से चली आ रही है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति का मूल भाव “सबमें बांटकर खाना” और “सबका कल्याण” है। भारत का लक्ष्य हैकृधर्म की जय, अधर्म का नाश, प्राणियों में सद्भावना और विश्व का कल्याण। पंडोखर सरकार धाम के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज ने कहा कि बच्चों को प्रतिदिन श्रीरामचरितमानस के दोहे और हनुमान चालीसा का पाठ कराना चाहिए। विज्ञान के युग में अध्यात्म की और अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति, साधना और उपासना ही हमें हर संकट से बचा सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका नायक ने की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। अंत में कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संघ के विभाग व महानगर स्तर के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।