
मातृशक्ति ही बच्चों की कर्णधार : प्रियंका श्रीवास्तव
उरई (जालौन)। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के तत्वावधान में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, झांसी रोड उरई में सप्तशक्ति संगम – मातृशक्ति सम्मेलन का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना से हुआ। इस अवसर पर नगर की माताओं ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। विद्यालय के प्रधानाचार्य अतुल कुमार वाजपेयी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही नारी का समाज में प्रथम स्थान रहा है। माँ बच्चों की प्रथम गुरु होती है, वही उनके जीवन की दिशा तय करती है। उन्होंने कहा कि आज की नारी अबला नहीं, बल्कि सबला है। उसे आत्मनिर्भर होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। मुख्य अतिथि के रूप में बालिका शिक्षा की प्रांतीय प्रशिक्षिका प्रियंका श्रीवास्तव (कानपुर) उपस्थित रहीं। उन्होंने मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिला ही परिवार, समाज और राष्ट्र की कड़ी है। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है और जब महिला परिवार को सशक्त बनाती है तो वही शक्ति समाज और फिर राष्ट्र तक पहुँचती है। उन्होंने महिलाओं को स्वदेशी, स्वाभिमान, स्वभाव, नागरिक कर्तव्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक किया तथा ज्ञान शक्ति, आत्म शक्ति, संस्कार शक्ति, संगठन शक्ति, रचना शक्ति, नेतृत्व शक्ति और राष्ट्र शक्ति के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। प्रियंका श्रीवास्तव ने कहा— “हम बदलेंगे, युग बदलेगा, तभी देश बदलेगा।” समाजसेविका शकुंतला यादव ने कहा कि माता उस बीज की तरह है जिसका सही पोषण भविष्य में मीठे फल देता है। उन्होंने बालिकाओं की सुरक्षा और मोबाइल के दुष्प्रभावों पर सचेत करते हुए माताओं से बच्चों को सही दिशा देने की अपील की। उनका कहना था कि शिक्षा ही व्यक्ति को उत्तम नागरिक बनाती है और शिक्षा के बल पर ही बच्चों के चरित्र का निर्माण संभव है। नगर की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रेनू चंद्रा ने कहा कि हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला की प्रेरणा और सहयोग रहा है। उन्होंने कहा कि यदि माताएँ बच्चों की गतिविधियों पर सतत निगाह रखें तो वही बच्चे बड़े होकर एक सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं। इस अवसर पर उर्मिला गुप्ता, सुनीता शर्मा, चुन्नी सिंह, प्रियंका दीक्षित समेत नगर की लगभग 80 महिलाएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र कुमारी ने किया जबकि कार्यक्रम प्रभारी विनीता नायक ने अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश उभरा कि माताएँ केवल परिवार की धुरी ही नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। बालकों का भविष्य, समाज की दिशा और राष्ट्र की मजबूती मातृशक्ति के मार्गदर्शन पर ही निर्भर करती है। रिपोर्ट - ओमप्रकाश उदैनियां