मातृभाषा के रूप में हिन्दी विश्व में दूसरे स्थान पर गौरवान्वित है - डॉ. अनिल कुमार दीक्षित

मातृभाषा के रूप में हिन्दी विश्व में दूसरे स्थान पर गौरवान्वित है - डॉ. अनिल कुमार दीक्षित

Written by Prem Prakash Agarwal 2025-09-14 News
देहरादून । हिन्दी दिवस के अवसर पर भारतीय संकलन समिति द्वारा एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तरांचल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. दीक्षित ने कहा कि “हिन्दी मात्र संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और अस्मिता का जीवंत प्रतीक है।” उन्होंने बताया कि हिन्दी देवनागरी लिपि से अलंकृत है और इसका हजारों वर्षों का गौरवशाली इतिहास है। संस्कृत से जुड़े होने के कारण इसकी ऐतिहासिक जड़ें लगभग पाँच हजार वर्ष पुरानी हो जाती हैं। उन्होंने गर्वपूर्वक उल्लेख किया कि मातृभाषा के रूप में हिन्दी आज विश्व में दूसरे स्थान पर है, जो हम सबके लिए गौरव की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 में हिन्दी को विशेष महत्व दिया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों में भाषा के संरक्षण और संवर्धन का मार्ग प्रशस्त करेगी। गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्रीमती मीना तिवारी ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में विभिन्न भाषाएँ और संस्कृतियाँ एक-दूसरे से जुड़ रही हैं, ऐसे समय में हिन्दी सोशल मीडिया पर 6ः की विकास दर के साथ तेजी से फैल रही है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के रूप में हिन्दी हमें एकता के सूत्र में बाँधती है और राष्ट्र की आत्मा से जोड़ती है। इस अवसर पर समिति के सदस्य मनोज मिश्रा, सुनील तिवारी, सुधीर अग्रवाल, सुश्री सौम्या अग्निहोत्री, सौरभ उपाध्याय सहित अनेक विद्वान और समाजसेवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ और यह संकल्प लिया गया कि हिन्दी भाषा को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।