
खुलासा: बिना प्रशिक्षित स्टाफ के चल रहे नर्सिंग होम
झाँसी। स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में लूट-खसोट का खेल झाँसी और आसपास के क्षेत्रों में खुलेआम चल रहा है। एक विस्तृत पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि करीब 150 से अधिक नर्सिंग होम में से 40% नर्सिंग होम बिना प्रशिक्षित डॉक्टरों और पंजीकृत नर्सों के संचालित हो रहे हैं। इलाज के नाम पर मनमानी वसूली, सुविधाओं का घोर अभाव और स्टाफ की कमी से आम जनता का जीवन सीधा खतरे में है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में 70 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश शिकायतें मनमानी फीस और गलत इलाज को लेकर थीं। वहीं, पिछले 6 महीनों में ही 12 से अधिक झगड़े और तोड़फोड़ की घटनाएँ अस्पतालों में दर्ज की गई हैं। मिलीभगत का खेल जांच में यह तथ्य सामने आया कि स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत के कारण ही यह अवैध कारोबार पनप रहा है। बिना पंजीकरण या अधूरे कागज़ात वाले नर्सिंग होम वर्षों से चल रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया— “अस्पतालों की फाइलों में सब कुछ दुरुस्त दिखा दिया जाता है, जबकि हकीकत में प्रशिक्षित डॉक्टर मिलते ही नहीं। अधिकारी निरीक्षण के नाम पर आते हैं और जेब गर्म कर चले जाते हैं।” जनता की बेबसी ➡️ “हमने बच्चे का इलाज कराना चाहा, लेकिन डॉक्टर नज़र नहीं आए। स्टाफ ही दवाइयाँ लिख रहा था। ऊपर से इतना बिल वसूला कि हमें कर्ज लेना पड़ा।” — संगीता, मरीज की माँ। ➡️ “हर महीने किसी न किसी अस्पताल में झगड़ा हो जाता है। असल वजह यही है कि इलाज सही नहीं होता और परिजनों से बेहिसाब पैसे वसूले जाते हैं।” — रमेश, स्थानीय निवासी। विशेषज्ञों की राय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बेहद खतरनाक है। “बिना योग्य डॉक्टर और प्रशिक्षित नर्स के नर्सिंग होम चलाना सीधा अपराध है। प्रशासन की मिलीभगत के कारण ही जनता शोषण का शिकार हो रही है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े हादसे और जानमाल की हानि की घटनाएँ बढ़ेंगी।” — डॉ. ए.के. मिश्रा, स्वास्थ्य विशेषज्ञ। अब जरूरी है सख्त कार्रवाई ✔️ स्वास्थ्य विभाग को तत्काल सभी नर्सिंग होम का औचक निरीक्षण करना चाहिए। ✔️ बिना पंजीकरण और योग्य स्टाफ वाले अस्पताल तुरंत सील किए जाएँ। ✔️ दोषी अस्पताल संचालकों और लापरवाह अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई हो। ✔️ जनता को जागरूक किया जाए कि इलाज के लिए हमेशा मान्यता प्राप्त अस्पताल ही चुनें।