
तहसील झाँसी में अमीन का भौकाल, चला रहा पूरा तहसील प्रशसन, बाहरी अधिकारियों को रखता है खौफ में
झाँसी। तहसील झाँसी वर्षों से अधिकारी नहीं एक अमीन चला रहा है। राजस्व का जितना नुकसान उसके हस्तक्षेप से सरकार का हुआ है उतना किसी और की अनदेखी से नहीं हुआ है। तहसील कर्मियों के अनुसार वह सुबह आकर कार्यालय में धमक जाता है। हर आने-जाने पर पैनी नजर रखता है जैसे ही कोई अपनी समस्या लेकर आता है तुरन्त साईड में ले जाकर अपने अनुभव व ज्ञान का ऐसा पाठ पढ़ाता है कि पीड़ित व्यक्ति उसकी लच्छेदार बातों में अपना पूरा दर्द बयान कर देता है। फिर पीड़ित उसके मकड़जाल में फँसता चला जाता है और शुरू हो जाता र्है आिर्थक दोहन, एवं मानसिक शोषण का खेल शुरू। मामला किसी भी क्षेत्र का हो वह हल करवाने का ठेका ले लेता है। दूसरा कोई अमीन कुछ कह ही नहीं पाता, कारण जानने पर पता चला कि उसके ऊपर स्थानीय नेताओं का वृहदहस्त है। विशेष जाति का होने के लाभ प्राप्त करता है सभी अधिकारी उसके भौकाल में आ जाते हैं। अपनी वाक् पटुता एवं अवैध धन वसूली की सोच पर उसे इतना घमण्ड है कि कोई भी अधिकारी तहसील स्तर का हो या जिला स्तर का, सभी उसके आगे नतमस्तक नजर आते हैं। उक्त के खिलाफ राजस्व परिशद के द्वारा जाँच के कई मामले लम्बित हैं, परन्तु स्थानीय किसी भी अधिकारी की जाँच को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं होती है। बैंक के अधिकारी भी उसके भौकाल से प्रभावित होकर अवैध आर.सी. जारी करके उसको अवैध रूप से पैसा वसूलने के लिये देते हैं साथ? यह बात यूंही नहीं लिखी जा रही है इसके साक्ष्य मौजूद हैं। कोई सक्षम अधिकारी हिम्मत करे तो मय सबूत के पेष किया जा सकता है। दंबग अमीन के भौकाल से डरकर व मानसिक तनाव में आकर कई अमीनों ने अपनी सेवा अवधि पूर्ण होने से पहले ही सेवानिवृति ले ली है। एक अमीन तो इतना दवाब में आ गया था कि आत्महत्या करने का मन बना लिया था। जब अन्य साथियों को पता चला तब समक्षा बुझाकर सेवानिवृति के लिये राजी किया गया। पता चला है कि उक्त भौकाली अमीन का सेवानिवृति का समय आ गया है तो वह और पूरे जज्बे के साथ बैखौफ होकर अवैध धन वसूली में लग गया है जबकि इस अमीन के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही कुछ साल पहले हुई थी, लेकिन कार्यवाही तो दूर की बात, वह फाइल ही गोल करवा दी गई। पता चला है कई लेन-देन की शिकायतें भी बकायेदारों द्वारा की गई थीं, लेकिन कभी कोई कार्यवाही उसके विरुद्ध नहीं की गई। विभाग के किसी भी कर्मचारी ने इसके विरुद्ध शिकायत की कोशिश की तो उसको क्षेत्र बदलने के साथ-2 कई प्रकार से उत्पीड़न किया जाता रहा है। अधिकारी इतने खौफ में रहते रहे हैं कि जो कार्य अधिकारियों द्वारा किये जाने वाले होतें उसका भी निर्णय ‘‘ सर्व शक्तिमान’’ अमीन लेता आ रहा है। मजे की बात तो यह है कि राजस्व परिशद की नियमावली के अनुसार 10 वर्ष से अधिक एक ही तहसील में जमे होने के बावजूद इसका नियमानुसार स्थानांतरण तक नहीं किया गया। उल्टा वह अन्य किसका स्थानांतरण कराना हैं किसका रोकना हैं वही अधिकारियों को मार्गदर्शन करता हैं। तथा खुद मनमाने अच्छे क्षेत्र पर अपनी तैनाती के साथ सभी के क्षेत्र में हस्तक्षेप रखता हैं।