
बैंक जैसे जिम्मेदार संस्थान में लापरवाह बैठे हों तो अन्य संस्थानो से क्या अपेक्षा की जाए?
उरई - जालौन। पैसे के लेनदेन मंे प्रतिदिन दिन भर का हिसाब सायं तक निबटाने वाले बैंक के कर्मी ही महिनो तक पैसा खाते मे जमा न कर अपने पाकेट मे रखे रहे तो इसे घोर लापरवाही न कहा जाय तो और क्या माना जाए? यदि बैंक ग्राहक जागरूक न हो तो उसका पैसा गया पानी मे! पैसा जमा कर लिया बैंक पर्ची भी दे दी और जब खाता धारक पैसा निकालने गया तो बताया जाता है कि आपका खाता बन्द है उसके लिये के वाई सी करानी पडेगी डाक्यूमेंट्स लाओ और पैसा जमा करो खाता धारक उक्त आदेश का पालन 13 जनवरी 2025 को करता है जिसमे आधार कार्ड, पेन कार्ड और नगद 500 रु जमा कराये जाते है और ग्राहक को ये कहकर घर जाने को कहा जाता है कि खाता चालू कर दिया जायेगा तो आपके पास काल आयेगी और आप, का एक टी एम कार्य करने लगेगा। ग्राहक समझदार और सभ्रांत परिवार से थे तो चले गये और इंतजार करते रहे । 05 अप्रैल 2025 को जब बैंक गये और सम्बन्धित पटल से बात की तो महाशय का कहना था कि आप खाता बन्द चल रहा है के वाई सी कराओ और रुपये जमा कराकर खाता चालू कराओ ग्राहक महोदय ने अपने संस्कारो का परिचय देते हुये कहा सर ये सब काम जनवरी मे ही हो चुका है खाता अब तक चालू हो जाना चाहिये थे 500 रु भी आपके पास जमा है, पटल पर बैठे बाबू तो ये सुनते ही भडक उठे और आपे से वाहर होने लगे कहते है जब भ्रष्ट व्यक्ति की गलती पकडी जाती है तो वह दबाने के लिये चिल्लाना शुरू कर देता है जिससे उसकी गलती उजागर न हो सके अधजल गगरी छलकत जाय के मुहावरे को लागू करते नजर आता है पर गम्भीर और सही व्यक्ति शालीनता का परिचय देता है वही इन ग्राहक महोदय ने किया उन्होने कहा बाबू जी भडकिये नही मैने जो कहा वो ही सही है साक्ष्य देता हूं आपको जब बैंक की जमा पर्ची सामने रख दी तो लाल पीले होने वाला बैंक कर्मी सन्न रह गया क्योकि कार्य मे घोर लापरवाही थी जनवरी 13 को के वाई सी के लिये कागज लिये गये साथ मे 500 रु की राशि भीऔर आज तक के वाई सी नही की गयी और तो और रू भी जमा नही किये गये रकम वढी नही थी तो क्या हुआ जमा उसी दिन होनी चाहिये थी अब ऐसी हालत मे बैंक कर्मी पीछे कैसे हटे तो बहाना करता है कि फादर के डाक्यूमेंट्स चाहिये तभी कही के वाई सी होगा जबकि खाता संयुक्त था एक व्यक्ति के डाक्यूमेंट्स से भी ये काम हो सकता था लेकिन अपनी लापरवाही का ठीकरा ग्राहक पर न फोडा तो बैंक कर्मी किस बात का? खैर ग्राहक शिक्षित था अच्छे परिवार से था संस्कारी था तो वह ज्यादा पचडे मे नही पडना् चाहता था इस लिये उसने फादर के डाक्यूमेंट्स मंगाकर जमा किये और अपना कार्य पूर्ण कराया हां उसके व्यवहार से बैंक से खाता जरुर बंद करा लिया, बैंक कर्मी सीधे खाता बन्द करने पर राजी नही हो रहा था तो उसमे कुछ राशि छोड दी और उसका लेनदेन बन्द कर देगा। उक्त मामला है जालौन के नगर कोंच में स्थित पंजाब नेशनल बैंक का है । ग्राहक तो हर तरीके से सबल थे यानि जानकार थे , जिम्मेदार थे इस लिये अपना पैसा सुरक्षित कर लिया काश कोई सामान्य व्यक्ति होता तो उसको तो खाता खुलवाने के लिये वर्षाे लग जाते और जो पैसा के वाई सी केलिये दिया था वो चला जाता और पुनरू पैसा भरना पडता । रिपोर्ट - ओमप्रकाश उदैनियां राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पत्रकार एकता संघ (जालौन उरई)