
किसानों को कुलपति ने वितरित की इलेक्ट्रिक स्प्रेयर मशीन
झाँसी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् - भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर (राजस्थान) की अनुसूचित जाति एवं जनजाति परियोजना के अंतर्गत आज रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के प्रांगण में 200 किसानों को इलेक्ट्रिक स्प्रेयर मशीन वितरित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने ग्राम दुर्गापुर, ढिकोली और भदरवारा के 200 महिला और पुरुष किसानों को इलेक्ट्रिक स्प्रेयर मशीन वितरित की। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इन मशीनों का उपयोग अपने खेतों में करने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी देना चाहिए, जिससे वे भी इस आधुनिक उपकरण का लाभ उठा सकें। उन्होंने बताया कि यह इलेक्ट्रिक स्प्रेयर मशीन एक अत्याधुनिक उपकरण है, जिसका उपयोग किसी तरल पदार्थ को स्प्रे करने के लिए किया जाता है। यह मशीन मुख्य रूप से पानी, खरपतवार नाशकों, फसल पोषण सामग्रियों और कीट नियंत्रण रसायनों के छिड़काव में सहायक होती है। इसके अलावा, इसका उपयोग विनिर्माण और उत्पादन प्रक्रियाओं में भी किया जा सकता है। कार्यक्रम संयोजक एवं वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान) डॉ. अर्तिका सिंह ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति परियोजना के अंतर्गत ग्राम दुर्गापुर, ढिकोली और भदरवारा के 200 महिला और पुरुष किसानों का चयन कर इस वितरण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर (राजस्थान) के सहयोग से किया गया। किसानों ने इलेक्ट्रिक स्प्रेयर मशीन प्राप्त कर हर्ष व्यक्त किया और इसे अपनी खेती में उपयोगी बताया। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को मशीन के रखरखाव और उपयोग की संपूर्ण जानकारी प्रदान की गई, जिससे वे इस तकनीक का अधिकतम लाभ उठा सकें। इस अवसर पर निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह, निदेशक शोध डॉ. एस.के. चतुर्वेदी, निदेशक शिक्षा डॉ. अनिल कुमार, अधिष्ठाता कृषि डॉ. आर.के. सिंह, अधिष्ठाता मात्स्यकी डॉ. एम.जे. डोबरियाल, कुलसचिव डॉ. एस.एस. कुशवाह एवं डॉ. राकेश चौधरी सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इन विशेषज्ञों ने किसानों को विभिन्न तकनीकी जानकारियाँ प्रदान कीं, जिससे वे अपनी फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ा सकें। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया गया है। विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान के इस संयुक्त प्रयास से किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे अधिक कुशल और आत्मनिर्भर बन सकें।