
गर्भवती महिला की मौत का वास्तविक जिम्मेदार कौन, चिरंजीव हॉस्पिटल अथवा स्थानीय प्रशासन?
झाँसी। विगत दिनों मेडीकल कॉलेज में बच्चों की मौत को झाँसी वासी भुला भी नहीं पाये थे कि प्राइवेट नर्सिंग होम चिरंजीव हॉस्पिटल में ईलाज/ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत हो गई। हाँलाकि यह कोई पहली मौत नहीं है, पूर्व में भी झाँसी के प्राईवेट नर्सिग होमों में कई घटनायें हो चुकी हैं जिसमें नर्सिंग होमों के प्रशासन की लापरवाही, गैर जिम्मेदारान रवैया के कारण विपरीत परिणाम आम जनमानस को भगतने पड़े हैं। नर्सिंग होमों में चल रही धांधली की कई शिकायतें जिम्मेदार अधिकारियों की टेबलों पर धूलें फाँक रही हैं अथवा डस्टबिन का हिस्सा बन चुकी हैं। सारी जानकारी स्थानीय प्रशासन के संज्ञान में है परन्तु जिम्मेदार अधिकारी/मेडीकल प्रशासनिक अधिकारी गुमसुम बैठे हुये हैं, इसमें लीपापोती पोती करते रहे हैं और और जनमानस को इसी तरीके से त्रस्त होन के लिये छोड़ दिया गया है। स्थानीय प्रशासन के ढुलमुल रवैया के कारण आम जनमानस पैसे के साथ-साथ अपने परिजनों को खोकर कुछ भी नहीं करने की स्थिति में हैं, आखिर कब तक झांसी में चंद पैसों की खातिर आम जनमानस की जिंदगी से खिलवाड़ किया जाता रहेगा? कोई भी नेता या समाजसेवी आगे बढ़कर नर्सिंग होमों में हो रही मनमानी को रोकने के लिए प्रयास नहीं करता। हाँलांकि बीच में झाँसी के समाजसेवी भानु सहाय द्वारा इन मुद्दों का उठाने का प्रयास किया परंतु वर्तमान सरकार में मौजूद नेता एवं स्थानीय अधिकारियों ने इस पर विशेष गौर नहीं किया इसके पीछे कारण क्या हो सकता है ? पीड़ित लोगों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन को इन नर्सिंग होमों से व्यक्तिगत लाभ प्राप्त होता है? हाँलाकि यह जांच का विषय है। विचारणीय है, जो मरीज पहले मेडिकल में भर्ती होते हैं, लेकिन वहां से पहुंच जाते हैं नर्सिंग होम में, कैसे? जितने ऑपरेशन या इलाज सरकारी मेडिकल में नहीं चल रहे होते हैं उससे कहीं ज्यादा प्राइवेट नर्सिंग होमों में कैसें? यह भी एक जांच का गम्भीर विषय है।