तेजी से असंतुष्ट हो रहे बनिया समुदाय को साधने के लिए मनीष गुप्ता को बनाया जा सकता है अगला प्रदेश अध्यक्ष

तेजी से असंतुष्ट हो रहे बनिया समुदाय को साधने के लिए मनीष गुप्ता को बनाया जा सकता है अगला प्रदेश अध्यक्ष

Written by Prem Prakash Agarwal 2025-01-02 News
लखनऊ। जनसंघ और भाजपा के उद्भव काल के समर्थक और मूल वोटर रहे वैश्य बनिया समुदाय जो कि आज वर्तमान सरकार की नीतियों से इतना आहत है कि उसने राजनीतिक विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। ऐसे में बनिया समाज का वोट भाजपा से कहीं बिखर न जाए इस कारण आगामी प्रदेश अध्यक्ष का पद वरिष्ठ भाजपा नेता मनीष गुप्ता को मिल सकता है। वैश्य समाज की भूतकाल और वर्तमान काल मनोदशा पर पारखी निगाह रखने वाले पत्रकार डी पी गुप्ता एडवोकेट ने अपना नजरिया लिखते हैं कि जनसंघ और भाजपा के शुरुआती दिनों में जब पार्टी अपने अस्तित्व को स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रही थी तब दरी बिछाने से लेकर मंच सजाने तक की जिम्मेदारी निभाने वाला वैश्य समाज का कोई नेता सन 1980 से लेकर आज 2024 तक भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन पाया है। भाजपा की अंदरूनी राजनीति में आखिर ऐसा कौन-सा खेल खेला जाता है कि जिसमें अपने ही मूल वोटर बनिया समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए उसे जहां एक तरफ नेतृत्व करने से दूर रखा जाता है, वहीं चंदा और टैक्स वसूलने में उसको प्रथम पंक्ति में रखा जाता है । पार्टी में लगातार होती उपेक्षा व जीएसटी की दोहरी मार से व्यथित बनिया समाज के लिए अब भाजपा में कोई सम्मानजनक जगह नहीं बची है। जो वैश्य बनिया समाज भाजपा से अभी भी जुड़ा है वह इस बार मनीष गुप्ता के प्रदेश अध्यक्ष बनने की आशा लगाये हुए है। पार्टी अगर मनीष गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाती है तो निश्चित ही नाराज चल रहे वैश्य समुदाय के जख्म पर मरहम लगाने जैसा कार्य होगा और उसको लगेगा कि उ प्र की भाजपा में उसके समाज को महत्व दिया जा रहा है। वैसे भी जिस पार्टी में क्षत्रिय समाज का मुख्यमंत्री हो और ब्राह्मण समाज और ओबीसी मौर्य समाज का उपमुख्यमंत्री हो तो ऐसे में भाजपा के मूल वोटर बनिया बिरादरी का क्लेम प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बनता ही है। अब ये तो भविष्य में ही पता चलेगा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी बनिया समाज के नाम जाती है या पहले की ही तरह उसे फिर हाशिये पर छोड़ दिया जाता है।