
बीजेपी की उपेक्षावादी नीति से दुखी ओबीसी बनिया समाज के लिए उम्मीद की किरण बन रहें हैं पवन गुप्ता
सुलतानपुर - लखनऊ। हर समाज और वर्ग की महत्वाकांक्षा रहती है कि उसके समुदाय का सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ राजनैतिक उत्थान हो और शासन सत्ता में यथोचित भागीदारी मिले। भूतकाल में जनसंघ और भाजपा जब हाशिए पर थी तब जिस वैश्य समाज ने उसकी दरी बिछाने से लेकर माला मंच सजाने का काम किया वही भारतीय जनता पार्टी आज सत्तारूढ़ होने के बाद बनिया व्यापारियों के हितों से जिस तरह किनारा कर रही है उससे वैश्य समाज में भारी आक्रोश पनप रहा है। भारतीय जनता पार्टी के राज में हो रही भारी उपेक्षा व उत्पीड़न से दुखी होकर उसका कोर वोटर ओबीसी बनिया समाज भी अपने समुदाय के सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक उत्थान के लिए एक अरसे से कोई दूसरा गैर भाजपाई विकल्प तलाश कर रहा था। एक लंबे अरसे के इंतजार के बाद ओबीसी वैश्य समाज को रामदास आठवले की पार्टी आरपीआई के उप्र अध्यक्ष पवन गुप्ता के रूप में एक बेहतरीन लीडर मिला है। प्रदेश के वैश्य बनिया व्यापारी समाज में एक गैर भाजपाई नेता के रूप में पवन कुमार गुप्ता की साख जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए ये अंदाजा लगाना बहुत ही आसान है कि भविष्य की राजनीति में ओबीसी वैश्य समाज को भाजपा के विकल्प के रूप में आरपीआई एक बेहतर पार्टी साबित होगी। आम जनता के प्रति लगातार उदासीनता बरत रही मायावती की पकड़ अब दलित समाज में लगातार कमजोर हो रही है उधर समाजवादी पार्टी का पिछड़ा प्रेम सिर्फ यादव समाज का बंधक बन चुका है, उसमें हिंदू समाज के अन्य पिछड़े वर्ग के नेताओं को एक यादव नेता के बनिस्बत कमतर आंका जाता है। इसी के साथ सपा का मुस्लिम तुष्टिकरण भी हिंदू ओबीसी समाज को रास नहीं आता है। इन परिस्थिति की समीक्षा करते हुए लेखक पत्रकार डी पी गुप्ता एडवोकेट का मानना है कि उ प्र में जिस तरह का माहौल बन रहा है उसे देखते हुए बहुत मुमकिन है कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के झंडे तले वैश्य, ओबीसी और दलित समाज के वोटरों का एक नया वोट बैंक बहुत जल्द देखने को मिल सकता है, जो आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की राजनीतिक समीकरण में प्रभावी भूमिका अदा करेगा।