
खाद्य विभाग :- त्योहारों पर ही टूटेगी विभागीय अफसरों की नींद
झाँसी | जैसे- जैसे त्योहार नजदीक आते हैं वैसे ही खाद्य विभाग कुम्भकरण की नींद से उठकर सक्रिय हो जाता है। केवल छोटी- मोटी छापेमार कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाता रहता है। खाद्य विभाग की हकीकत यह है कि वह त्योहारों पर ही खाद्य पदार्थ के बाजार में छापामार कार्रवाई करता है। जबकि बाजारों में बड़ी मात्रा में घटिया एवं नकली खाद्य पदार्थों का भंडारण है । मगर खाद्य विभाग ने इन बाजारों में कोई कार्रवाई नहीं करता. बाजार में बिक रही खाद्य सामग्री मिलावट रहित हो, सुरक्षित हो। इसका दायित्व खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्रशासन विभाग का है। फिर भी विभाग खाद्य पदार्थों की प्रयोगशाला से आईं जांच रिपोर्ट पर ही कुंडली मार के बैठ जाता है। कार्रवाई तो दूर, इन रिपोर्ट की हकीकत तक दबा कर रखी जाती है। कई व्यापारी, उद्यमी का कहना है कि सैंपल लेकर और उनकी रिपोर्ट का हवाला देकर दबाव बनाया जाता है। विभाग की कार्यशैली संदेह के घेरे में आ गई है। प्रशासन के अफसर भी आंखे मूंदे हैं। इन रिपोर्ट में कितने सैंपल पास हुए और कितने फेल हुए, किस प्रतिष्ठान के किस पदार्थ में क्या मिलावट मिली। इसका सच सिर्फ फाइलों में ही कैद है। जबकि शासन से कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं कि न सिर्फ लोगों को मिलावटी पदार्थों के बारे में जागरूक किया जाए, बल्कि मिलावटखोरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी करें। खाद्य विभाग द्वारा इन सैंपल की जांच रिपोर्ट में क्या आया। यह किसी को पता नहीं रहता । सूत्रों की माने तो जनपद में संचालित नामचीन भोजनालय, मिठाई की दुकानों व चाय नाश्ता की बेहतरीन दुकानों पर विभाग के कर्मियों की मासिक बंदी बंधी हुई है जिनसे हर माह हफ्ता वसूली विभाग के कर्मी करते हैं, बताया जाता है कि अवैध वसूली खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी करते हैं वसूली के बाद राशि का बंदरबांट जनपद के जिम्मेदार अफसरों के बीच में होता है। सूत्र यह भी बताते हैं कि मिलावट के इस खेल में दुकान संचालकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है लेकिन हफ्ता वसूली के चलते खाद्य विभाग के अधिकारी उन्हें मिलावटखोरी करने की खुली छूट प्रदान करते हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीरो टॉलरेंस निति पर काम करके सरकार की छवि को सुदृण करने में लगी है, लेकिन ऐसे में कुछ विभागों के अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल करने में लगे हैं