
उत्तम तप धर्म की आराधना को पहुंचे श्रद्धालु
झाँसी। दिगंबर जैन पंचायत समिति झांसी के तत्वाधान में जैनधर्म के दशलक्षण पर्व के अवसर पर आज सातवें दिन गांधी रोड स्थित बड़ा मंदिर जी में चतुर्मासरत मुनिसंघ के दर्शनार्थ, अभिषेक पूजन व देवदर्शन हेतु भारी संख्या लोग पहुंचे। इसी क्रम में प्रातःकाल आचार्य विशद सागर जी मुनिराज के ससंघ सान्निध्य में भारी संख्या में मौजूद श्रावकों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच भगवान का अभिषेक एवम् शांतिधारा अमित प्रधान, दीपक जैन, राजीव आगम भंडारी, संजय जैन (भूचेरा) द्वारा की गई। इस अवसर पर आचार्य श्री विशद सागर जी ने उत्तम तप धर्म पर बोलते हुए कहा कि इच्छाओं पर नियंत्रण पाने को ष्तपष् कहते हैं, विषय कषायों का त्याग करके बारह प्रकार के तप में चित्त लगाना ही ष्उत्तम तपष् धर्म है, तप धर्म का प्रमुख उद्देश्य चित्त की मलिन प्रवृत्तियों को दूर करना है। नित्य की भांति दोपहर में तेरहद्वीप विधान अनिल बाजा व रविंद्र जैन के निर्देशन में संपन्न हुआ। जैनधर्म के मूल ग्रंथ तत्वार्थ सूत्र की नियमित कक्षाये तपस्वी मुनिश्री विशाल सागर जी द्वारा ली जा रहीं जिसमे अनेकों श्राविकाएं ज्ञानार्जन कर रहीं हैं। नित्य की भांति सायंकालीन सामूहिक संगीतमय आरती विभिन्न सांस्कृतिक एवम ज्ञानवर्धक कार्यक्रम संपन्न हुए। शास्त्र सभा में विद्वान डा. पुलक गोयल (जबलपुर) ने उत्तम तप धर्म की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि तपस्या चारों गतियों में मात्र मनुष्य गति में ही संभव है, अतः अपने मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने के लिए यथासंभव तप करना चाहिए। इस अवसर पर आशीष भारिल्ल, डा. के सी जैन, देवेंद्र मगरपुर, शिखर चाचा, ऋषभ भंडारी, सुभाष जैन, जितेंद्र चौधरी, सुनील जैनको, दिनेश जैन (बक्सा) राजकुमार बाबा, राजेंद्र जैन (मुनीम सा.), आलोक जैन (विरधा) योगेश जैन, चक्रेश चौधरी, जतिन अछरौनी, संयोग सम्यक, भंडारी, कमलेश, ऋषि जैन, पवन सुनारी, एड अनूप जैन, नितिन, सौरभ जैन आदि उपस्थित रहे। संचालन श्रीमती रजनी जैनको एवम् आभार जितेंद्र चौधरी ने व्यक्त किया। सादर