आतंकवाद निरोधक दस्ता यूपी एटीएस के एएसपी संजय कुमार ने निशानेबाजी में आठ मेडल जीत कर रचा इतिहास

आतंकवाद निरोधक दस्ता यूपी एटीएस के एएसपी संजय कुमार ने निशानेबाजी में आठ मेडल जीत कर रचा इतिहास

Written by Prem Prakash Agarwal 2024-07-24 News
सुलतानपुर। भारत सरकार द्वारा सुचिबद्ध संस्था मानव अधिकार संरक्षण व पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय प्रभारी डी पी गुप्ता एडवोकेट ने दिल्ली में हुए 47 वीं यूपी स्टेट शूटिंग कम्पटीशेन में निशानेबाजी की प्रतियोगिता में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करने पर आईपीएस संजय कुमार को बधाई पत्र जारी करते हुए उनकी सराहना किया और आशा व्यक्त किया कि संजय कुमार एक दिन इंटरनेशन पदक जीत कर देश का नाम रोशन करेंगे। विदित हो कि आईपीएस संजय कुमार ने निशानेबाजी में दो स्वर्ण पदक, चार सिल्वर, दो ब्रांज मेडल जीत कर एक इतिहास कायम किया है। ये पदक उन्होंने 25 मीटर .32 बोर सेंटर फायर कम्पिटीशन व 50 मीटर .22 बोर फ्री पिस्टल कम्पिटीशन एवं 25 मीटर .22 बोर स्टैंडर्ड पिस्टल कम्पिटीशन और 10 मीटर .177 एयर पिस्टल कम्पिटीशन की प्रतियोगिता जीत कर हासिल किया है। आईपीएस संजय कुमार एक बेहतरीन निशाने बाज हैं और इन्होने 2018 में दो खुली अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में प्लजेन (चेक गणराज्य) व हनोवर (जर्मनी) में भाग लिया था। विदित हो कि संजय कुमार इस समय बतौर एडिशनल एसपी यूपीएटीएस लखनऊ में पिछले चार साल से तैनात है। आईपीएस संजय कुमार के पिता श्री रामरतन शर्मा मुरादाबाद में रेलवे विभाग में कार्यरत थे जिसके चलते इनकी शुरूवाती शिक्षा उस समय में यूपी के प्रसिद्ध कॉलेज पार्कर इंटर कॉलेज मुरादाबाद से हुई थी। 12‌ वीं कक्षा के बाद श्री शर्मा भारतीय नौसेना में चयनित होकर अपनी नौकरी शुरू कर दी थी लेकिन हिंदू डिग्री कॉलेज मुरादाबाद से स्नातक बीएससी (पीसीएम) पूरा करने के कारण नौकरी छोड़ दी। पुनः ग्रेजुएशन के बाद इन्होंने सहायक कमांडेंट के रूप में यूपीएससी की तुलना में अपनी प्रतियोगी परीक्षा यानी एसएससी, यूपीएमसीएटी, बीएचएम, यूपी एसआई पास की थी। संजय कुमार को एसपीजी (प्रधानमंत्री सुरक्षा) अधिकारी के रूप में चुना गया था जिसके तहत इन्होने दिल्ली में प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेयी और मनमोहन सिंह को अपनी सेवाएँ दी थी। उस दौरान जब वे केंद्र में थे तब इन्होने जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग जिले में तीन साल और एलओसी नियंत्रण रेखा पर डायट राजौरी में तीन साल और जिला कांकेर छत्तीसगढ़ के ऊंचे नक्सल प्रभावित इलाके में दो साल तक आतंकवाद विरोधी लड़ाई में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी किया था।