
"अम्बा नींबू बनिया गर दाबे रस दे" जैसी कहावतें जिस समाज में प्रचलित हों वहां से सम्मान की कोई उम्मीद नहीं है सनातन धर्म का दाता कौम होने के बावजूद ये हमेशा होता है अपमानित, बनिया संरक्षण एक्ट लागू करे सरकार
सुलतानपुर। भारत सरकार द्वारा सुचिबद्ध संस्था मानव अधिकार संरक्षण व पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय प्रभारी डी पी गुप्ता एडवोकेट ने दानवीर भामाशाह जयंती पर सभी राष्ट्रवादी शक्तियों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार अगर वास्तव में व्यापारियों की हितैषी है तो उसे बनिया संरक्षण एक्ट लागू करना चाहिए क्योंकि दानवीर भामाशाह के वंशज आज भी धर्म और राष्ट्र का संरक्षण करने से पीछे नहीं हटते परंतु आज के दौर में बनिया व्यापारी के साथ वही व्यवहार किया जा रहा है जो कभी दलित समाज के साथ किया जाता रहा है। देश और धर्म की सेवा में लिए सदैव अग्रणी भूमिका निभाने वाले वैश्य समाज को अक्सर जातिवाचक शब्द से अपमानित होना पड़ता है। बनिया हो , बनिया की तरह रहो, बनिया की ...., आदि आदि वाक्य वैश्य समाज के हर व्यक्ति को सुनना ही पड़ता है। "अम्बा नींबू बनिया गर दाबे रस दे" ये ऐसी तमाम कहावतें है जिसे सामंतवादी शक्तियां वैश्य समाज को सुना कर उसे अपमानित और उत्पीड़ित करती चली आ रहीं हैं। ये खुशी की बात है कि सैकडो़ साल बाद ही सही, देश में ऐसी सरकार आई है, जिसने 29 जून दानवीर भामाशाह जयंती पर व्यापारी कल्याण दिवस का आयोजन कर रही है। निश्चित ही जिस क्षेत्र में व्यापारी समाज का सम्मान होता है वह समाज आर्थिक रूप से सुदृढ़ होता है । जिस इलाके में व्यापारी कारोबार शुरु कर देता है उस क्षेत्र की जमीन की कीमत आस पास के इलाके से ज्यादा मंहगी हो जाती हैं। वैश्य व्यापारियों की सरकार से एक ही मांग है कि उसे सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीवन यापन करने दिया जाए। आज के दौर में जिस तरह का जातिवादी माहौल है उसमें वैश्य समाज के मान सम्मान की रक्षा के लिए बनिया संरक्षण एक्ट जैसे प्रावधान लागू किये जाए।