
संत रविदास जयन्ती मनाई गयी।
नगर के स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कालेज हमीरपुर में आज संत रविदास जयन्ती के सुअवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री रामप्रकाश गुप्ता ने बोलते हुए कहा कि सन्त रविदास का जीवन कर्मयोग का अनुपम उदाहरण है। उन्होने अपने आचरण एवं व्यवहार से यह सिद्ध कर दिखाया कि मानव अपने जन्म तथा कर्म से ही महान बन जाता है। वे कहा करते थे कि ‘‘ जब मन चंगा तो कठौती में गंगा’’। मध्य युगीन साधको मे रैदास या रविदास का विशिष्ट स्थान है। रैदास संत कबीरदास के समकालीन थे। निम्न वर्ग मे वेे उत्पन्न होकर भी उत्तम जीवन शैली उत्कृष्ट साधना पद्धति तथा उल्लेखनीय आचरण के कारण वे आज भी भारतीय धर्म साधना के इतिहास में सादर स्मरण किये जायेगे। संत रविदास जी ने भगवान की भक्ति मे समर्पित होने के साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यो का भी बखूभी निर्वहन किया। संत रविदास ने हमेशा जातिवाद को त्याग कर प्रेम से रहने की शिक्षा दी। उन्होने अच्छे कर्मो और गुणो को जरुरी माना है लोगो का भला करना और साफ मन से भगवान मे आस्था रखना ही उनका स्वभाव था। कार्यक्रम की शुरुआत माॅ सरस्वती एवं संत रविदास के चित्र पर पुष्पार्चन एवं माल्यार्पण के साथ हुई। कार्यक्रम का विधिवत संचालन एवं आभार संगीताचार्य ज्ञानेश जड़िया ने किया। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ एवं छात्र-छात्राये उपस्थित रहे। यह जानकारी विद्यालय के मीडिया प्रभारी आचार्य श्री वेदप्रकाश शुक्ला ने दिया।