
हार्ट फेल की चपेट में आ रहे भारतीय युवा, आपके हाथ में ही है बचाव
झाँसी | यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में कार्डियक साइंसेज के एचओडी एंड सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर पंकज रंजन ने दिल से जुड़ी बीमारियों, इसके लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. डॉक्टर रंजन ने बताया कि भारत समेत पूरी दुनिया में दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले काफी ज्यादा बढ़ रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, हर पांच में से एक पुरुष और 8 में से एक महिला दिल की बीमारियों के कारण मौत की चपेट में आ रहे हैं. इस तरह के मामलों में ये बढ़ोतरी धमनियों में फैटी चीजें जमा हो जाने के कारण हो रही हैं क्योंकि इसकी वजह से दिल की ब्लड सप्लाई बाधित हो जाती है. धूम्रपान, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी दिक्कतें दिल की सेहत को और ज्यादा खराब करती हैं. कुछ वक्त पहले तक हार्ट की बीमारी उम्रदराज लोगों में ज्यादा देखी जाती थी लेकिन अब ट्रेंड बदल गया है जो काफी चिंताजनक है. जो युवा 20, 30 या 40 की उम्र में हैं वो भी हार्ट डिजीज की चपेट में आ रहे हैं. मॉडर्न लाइफ में जिस तरह का तनाव है उसके कारण यंग आबादी के हार्ट भी कमजोर हो रहे हैं. इसके अलावा जेनेटिक कारण और फैमिली हिस्ट्री भी हार्ट डिजीज के रिस्क फैक्टर माने जाते हैं. युवाओं में हार्ट डिजीज के ज्यादातर केस अधिक तनाव, काम से ज्यादा घंटे, नींद के पैटर्न में असामान्यता, स्मोकिंग और खराब जीवनशैली के कारण सामने आ रहे हैं. हार्ट डिजीज का पता लगाने के लिए फुल मेडिकल जांच और फैमिली हिस्ट्री देखी जाती है, जीवनशैली का मूल्यांकन किया जाता है और ब्लड टेस्ट किए जाते हैं. बीमारी की पुष्टि करने के लिए ईसीजी, एक्स-रे, ट्रेडमिल टेस्ट (टीएमटी), कार्डियोवैस्कुलर कार्टोग्राफी, सीटी एंजियोग्राफी और इनवेसिव कोरोनरी एंजियोग्राफी कराई जाती है. क्या है समाधान कोरोनरी हार्ट डिजीज को ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव करके, दवाओं और नॉन-इनवेसिव इलाज के जरिए इसे मैनेज किया जाता है. गंभीर मामलों में इनवेसिव और सर्जिकल प्रकियाओं की जरूरत पड़ सकती है. संतुलित आहार लेकर, रेगुलर एक्सरसाइज करके, धूम्रपान से परहेज और ब्लड कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को कंट्रोल करके क्रोनिक हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और डिमेंशिया से बचाव किया जाता है.