बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा (गैर राजनैतिक संस्था) के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के गेट पर पर्चा बाँटते |

बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा (गैर राजनैतिक संस्था) के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के गेट पर पर्चा बाँटते |

Written by Prem Prakash Agarwal 2023-05-23 News
झांसी। जैसा कि आप सभी विद्यार्थी एवं सम्मानित शिक्षकगण जानते है कि बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा (गैर राजनैतिक संस्था) पिछले 15 वर्षो से निरन्तर बुन्देलखण्ड एवं बुन्देलखण्ड वासियो के हित के लिए कार्य कर रहा हैं। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के अर्न्तगत आने वाला अखण्ड बुन्देलखण्ड क्षेत्र भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार के कागजो मे पिछड़ा क्षेत्र दर्ज कागजात है। भारत की आजादी के 75 साल बाद भी देश का हृदय भाग बुन्देलखण्ड समग्र विकास की धारा से कटा हुआ है। सत्य यह है कि कुछ बाहरी भाग को छोड़कर आज भी बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं अन्य मूल भूत सुविधाओ से वचित है। इसका मूल कारण राजनैतिक दल नही है जो चुनाव के समय सामने आते है और झूठे वादे कर के हमारा अमूल्य वोट ले जाते है वल्कि हम और आप है जो अपना महत्व ही नही जानते हैं। बुन्देलखण्ड की धरा पर माँ भवानी के स्वरूप में वीरांगना श्री लक्ष्मी बाई ने 1857 में यह सिद्ध कर दिया था कि हम बुन्देलखण्डी पिछडे नही है और हम अपना नेतृव्व स्वंय करना जानते है। बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा (गैर राजनैतिक संस्था) द्वारा एक वार पुन माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, उपमुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री एवं माननीय सभापति जी उत्तर प्रदेश विधान परिषद को अवगत कराया गया है कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र में उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय है जो कि स्ववित्त पोषित है। प्रदेश में बनी सभी राजनैतिक दलों की सरकार को बुन्देलखण्ड क्षेत्र की पीड़ा का अहसास रहा परन्तु किसी ने भी कोई भी ऐसा कार्य नही किया जिससे पिछड़े क्षेत्र बुन्देलखण्ड के विद्यार्थियों को सस्ती एवं अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके ताकि वे भी देश एवं प्रदेश में प्रदेश स्तर की परीक्षाओं को पास कर नौकरी प्राप्त कर सकें। चूँकि विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश शासन से किसी भी मद में कोई भी राशि अनुदान में प्राप्त नहीं होती है और उक्त विश्वविद्यालय में 8 विभाग नियमित है परंतु उक्त नियमित विभागो में भी कोई धनराशि शासन से किसी मद जैसे वेतन आदि में प्राप्त नही होती है इस कारण एक बड़ी धनराशि वेतन, पेंशन पर ही व्यय हो जाती हैं इसके अतिरिक्त ज्यादातर कोर्स स्ववित्त पोषित योजना के अंतर्गत लगभग 25 विभाग संचालित किए जा रहे है इस लिए विश्वविद्यालय को अपनी फीस आदि में वृद्धि करनी पड़ती है विगत दो या तीन वर्षो में समस्त कॉसेज में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है अब ऐसे में बुन्देलखण्ड जैसे पिछड़े क्षेत्र के गरीब अपने बच्चों को कैसे उच्च शिक्षा प्रदान करेगें । विश्वविद्यालय में एक ओर नियमित शिक्षक है जिनका वेतन लाखों में है वहीं पर सामान कार्य करने वाले स्ववित्त पोषित शिक्षक एवं शिक्षणोत्तर | कर्मचारी का वेतन बहुत कम हैं तथा सबसे दयनिय स्थिति में शिक्षण सहायक है जो इस महंगाई में अपना और अपने बच्चों का पेट बड़ी मुश्किल से भर पा रहा हैं। विश्वविद्यालय के अन शिक्षण साहक को विश्वविद्यालय मूलभूत सुविधा जैसे आवास भी उपलब्ध नहीं कर रहा है अतः विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के हित के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को सर्वप्रथम यही कार्य करना चाहिये कि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को स्ववित्त पोषित स्कीम से निकाल कर 100 प्रतिशत सरकारी अनुदान दिया जाना चाहिये और अब विश्वविद्यालय को सरकार द्वारा अनुदानित करने वाली स्कीम में शामिल करना चाहिये और अब बुन्देलखण्ड की धरती पर बुन्देलियों की भर्ती होनी चाहिये। अगर अब भी | सरकार उचित निर्णय नहीं लेती है तो बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा (गैर राजनैतिक सस्था) संवैधानिक रूप से अनशन एवं सरकार को एवं सरकार के मंत्रियों को काले झंडे दिखाकर घेरने का कार्य किया जाएगा। बुन्देलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के गेट पर पर्चा बाँटते हुए विधानपरिषद अध्यक्ष कुँवर मानवेन्द्र सिंह जी को धन्यवाद दिया गया कि उन्होंने बुंदेलियो की पीड़ा समझ कर उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिख। पर्चा बांटने वालो में अशोक सक्सेना, रघुराज शर्मा, गिरजा शंकर राय, हनीफ खान, बंटी दुबे, अरुण रायकवार, प्रेम सपेरा, शंकर रायकवार एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शामिल रहे। पर्चा बांटे जाने कार्य 2 दिन ओर जारी रहेगा।