मेयर पद के लिये भाजपा से पूर्वमंत्री बिहारीलाल आर्य,सपा से पूर्व बिधायक सतीश जतारिया ने नामांकन किया
पूर्व मेयर किरन वर्मा ने निर्दलीय नामाकंन करके सबको चौंकाया? बिहारी लाल आर्य पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश शासन भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने पहुंचे उनके साथ जिला अध्यक्ष मुकेश मिश्रा पूर्व मेयर रामतीर्थ सिंघल, सांसद अनुराग शर्मा व 5-6 लोगों के साथ मिलकर उन्होंने पर्चा दाखिल किया। नामांकन के मौके पर पूर्व मंत्री बिहारी लाल आर्य ने पत्रकारों को बताया कि सरकार के कामकाज से जनता बेहद प्रसन्न है और नगर निगम में जो काम अभी अधूरे हैं उनको शीघ्र ही पूरा करवाने का कार्य किया जायेगा। पूर्व मेयर किरन वर्मा द्वारा निर्दलीय पर्चा भरे जाने को लेकर टालते हुये शीघ्र ही नाराजगी दूर करने का कार्य किया जायेगा। इसी क्रम में पूर्व विधायक सतीश जताारिया, पूर्व साँसद चन्द्रपाल सहित 4-5 लोगों के साथ अपना नामांकन करने पहुंचे। सतीश जतारिया ने वर्तमान व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए पत्रकारों को बताया कि आम व्यक्ति के ऊपर जिस तरह से हाउस टैक्स का बोझ, वाटर टैक्स का बोझ डाल दिया गया है और खड़ी गाड़ी के चालान कर के लगभग 5 करोड़ के चालान किये जा चुके हैं जिनको अभी र चुनाव के कारण रोक दिया गया है। चुनाव समाप्ति के बाद यह जब घर में जाएंगे तो हाहाकार मचेगा। जनता परेशान हो जाएगी और यदि मुझे मौका मिला तो हाउस टैक्स हाफ करके वाटर टैक्स माफ करने का कार्य प्राथमिकता से किया जायेगा। और जो चालान किए गए हैं उनको भी माँफ करने का कार्य करेंगे। निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने का कार्य करूंगा। एक सवाल 38 पार्षदों को ही क्यों सपा द्वारा टिकट बाटें गये के जवाब में कहा कि 38 तो हमारे कर्मठ कार्यकर्ता हैं, जिनको पार्टी के सिम्बल से चुनाव लड़वाया जा रहा है। शेष में हम अपने समर्थन के द्वारा प्रत्याशी खड़े किए गए हैं। वही समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता चंदपाल नेता ने बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया ऐसा बोला स्मार्ट सिटी के नाम से आम जनमानस से पैसे वसूले जा रहे हैं पर सुविधाएं नदारद हैं आम व्यक्ति ने 3 इंजन की सरकार केंद्र में राज्य में और नगर निगम में पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी आम जनमानस को जिस तरह से परेशान कर रखा है सरकार से जो अपेक्षाएं थी लोगों को वह उन पर खरे नहीं उतरे जिससे जनता बहुत ही नाराज है। भाजपा के प्रत्याशी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग ही भाजपा का विरोध कर रहे हैं, भाजपा प्रत्याशी बिहारी लाल आर्य जो कि मऊरानीपुर के रहने वाले हैं उनको पैराशूट बना करके उम्मीदवारी के लिए उतारा गया, जिससे भारतीय जनता पार्टी के अंदर ही बगावत देखने को मिल रही है। पूर्व मेयर किरण वर्मा ने भी पार्टी के विरुद्ध जाकर अपना नामांकन भरा इससे भाजपा में असंतुष्टी साफ नजर आ रही है। देखने वाली बात ये है कि भाजपा में कई वार्डों में जो कैडर के कार्यकर्ता हैं उनकी अनदेखी की गई और ऐसे लोगों को टिकट आंवटन किया गया जो सक्रिय कार्यकर्ता भी नहीं हैं। जिन लोगों ने भाजपा के विरूद्ध चुनाव लड़कर भाजपा को हराया उन्हीं को टिकट थमा दिया गया। पार्टी के अन्दरखाने से छन-छनकर खबर आ रही है कि स्थानीय नेताओं की मनमानी और पैसे को मापदंड मानकर टिकट का वितरण किया गया जिससे खासी नाराजगी है। चर्चा की जा रही है कि पैनल में नाम भेजने के लिये भी पैसे का बन्दरबाँट हुआ है। कई वार्डों में चुनाव अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही अपना टिकट फाईनल घोषणा कर देना विचारणीय है। टिकट आँवटन से पूर्व ही वार्डों में अपने को अधिकृत प्रत्याशी मान लिया गया था। इस बार टिकट बंटवारे में पार्टी के लोगों की अनदेखी से अन्दरूनी बगावत साफ देखी जा सकती है। लोग खुलेआम पैसा लेकर के पैनल में नाम भेजने का आरोप लगा रहे हैं यह देखने वाली बात है कि क्या होता है। यह कोई विधानसभा या लोकसभा का चुनाव नहीं है जिसमें पार्टी का महत्व होता है। परन्तु सत्तारूढ़ दल के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। प्रत्याशियों का ये मानना है कि एक बार भाजपा से टिकट मिल गया तो समझो जीत पक्की है। कइयों के मनसूबों पर पानी फिर जाने से उन्होंने निर्दलीय पर्चा भरकर नाराजगी व्यक्त की है। स्थानीय नेताओं एवं केडर के लोग उन्हें मनाने का प्रयास करते हैं या इस चुनौती को स्वीकार करते हैं। अब मतदाताओं को स्वयं तय करना है कि जो व्यक्ति पैसा देकर टिकट लाया है वह आपके काम आयेगा या सामाजिक कार्यकर्ता जो स्थानीय समस्याओं को पूरा कर सके ऐसे प्रत्याशी को चुनना है?