१०० वर्ष पूर्ण होने पर आज सेठ रामदयाल सरस्वती शिशु मंदिर एवं कन्या इंटर कॉलेज में

Written by Prem Prakash Agarwal 2023-01-27 News
झांसी। 1970 में भूमि दान देने वाले स्व० रामदयाल सेठ के पुत्र श्री बच्चूलाल जी की आयु १०० वर्ष पूर्ण होने पर आज सेठ रामदयाल सरस्वती शिशु मंदिर एवं कन्या इंटर कॉलेज में 74 वें गणतंत्र दिवस बसंत पंचमी एवं जन्म उत्सव कानपुर से आकर अपने पूरे परिवार के साथ विद्यालय में मनाया। शहर के बीचो बीच स्थित विशालकाय रूप ले चुका यह विद्यालय प्ले सेंटर से बारहवीं तक भारतीय संस्कृति कि संस्कारों को प्रदान करने का महत्वपूर्ण स्थल बन गया यहां शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों को भी प्राथमिकता से दिया जाता है। शिक्षा शिक्षा खेल एवं संस्कार की त्रिवेणी बना सेठ रामदयाल सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य श्री श्री कल्पना सिंह के कुशल नेतृत्व में एवं दूरगामी सोच के चलते विद्यालय आज उत्तरोत्तर तरक्की कर रहा है स्व वित्त पोषित संस्था में गहोई समाज के गौरव सेठ बच्चों लाल जी के पिता श्री रामदयाल सेठ ने जब यह भूमि प्रदान की थी तब विद्यालय प्राथमिक शिक्षा दिया करता था, समाज के सहयोग एवं विद्यालय की सीमित आय को एकत्रित कर विद्यालय का निर्माण कराया गया जिसमें आज प्ले सेंटर से कक्षा 8:00 तक भैया बहन एक साथ पढ़ते हैं तथा कक्षा 6 से 12 तक कन्याओं के लिए यह विद्यालय पूरी तरह से समर्पित है जिसमें सभी आधुनिक लैब के साथ शिक्षा दी जाती है एक महत्वपूर्ण बात यह भी है इस विद्यालय की प्रधानाचार्य का आसपास ग्रामीण क्षेत्र में जहां छात्राएं अपनी शिक्षा से वंचित रह गई थी आज उनके दर्शन से ऐसी बाते छात्राएं अच्छे नंबरों से पास होकर जिला स्तर पर अपना नाम रोशन कर रही हैं और इसमें पूर्ण रूप से मनोयोग से कानपुर में रहते हुए सेट परिवार किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने देता यह उनकी सोच का समाज समाज के हित के लिए कार्य करने वाला प्रेरणादायक कार्य है। गणतंत्र दिवस बसंत पंचमी एवं सेट बच्ची लाल जी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम का शुभारंभ धार्मिक अनुष्ठान के रूप में हवन पूजन कर किया गया शहीदों के चित्रों के सामने दीपांजलि दी गई बच्चों को स्कूल बैग बैठकर प्रसाद किया गया तथा शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को भी शॉल उड़ाकर सम्मानित किया गया तत्पश्चात उपस्थित लखा के स्कूल के 12 बच्चे व उनके अभिभावकों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। सच्चाई और अच्छाई की तलाश में पूरी दुनिया घूम ले अगर वह हमारे अंदर नहीं तो कहीं।